नोटबंदी का एक और बड़ा खुलासा उर्जित पटेल ने दी लिखित में रिपोर्ट

नोटबंदी का इलजाम रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने सिर पर लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा ये नोटबंदी का फैसला मोदी सरकार का था, न की रिजर्व बैंक का। मोदी सरकार ने नोटबंदी के लिए रिजर्व बैंक को दोषी ठहराया था। लेकिन पिछले महीने में संसदीय पैनल को दी गई रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में साफ कहा गया की नोटबंदी का फैसला नरेन्द्र मोदी की सरकार का था।

वित्त विभाग से जुड़ी वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली संसदीय कमेटी में 22 दिसंबर को रिजर्व बैंक ने नोटबंदी को लेकर सात पन्नों का नोट जमा कराया था।

इस पत्र में बताया गया है, की मोदी सरकार ने रिजर्व बैंक को सलाह दी थी, की आतंकवाद की फंडिंग, काले धन और जाली नोटों की समस्या को रोकने के लिए बड़े नोट की क़ानूनी मान्यता वापस ली जा सकती है। पत्र में ये भी कहा गया बड़े नोट काले धन में बड़ी भूमिका निभाते है। लेकिन काले धन को मिटाने से समानांतर अर्थव्यवस्था भी खत्म हो जाएगी। और इससे भारत की विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

नोटबंदी का फैसला तब लिया जाता है। जब नए छपे नोट का स्टॉक जरुरी मात्रा में हो जाये। तो नोट बंदी का फैसला लिया जा सकता है। लेकिन 8 नवम्बर 2016 को रिजर्व बैंक का डाटा बताता है, की बैंक में केवल 94,660 करोड़ रुपये के 2000 रुपये के नोट थे। ये नोटों की संख्या बाजार में फैले 500 1000 के सिर्फ 6 प्रतिशत थी। पुराने नोटो की संख्या 15 लाख करोड़ है। इस लिए पता चलता है की नोट बंदी का फैसला जल्द बाजी में लिया गया था। और इस वजह से देश को कितना नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ा।

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