जब वेंकैया नायडू ने बोला था- मुझे तो कुछ नहीं बनना मैं तो उषा-पति बनकर ही खुश हूं

नई दिल्ली: एनडीए उम्मीदवार वेंकैया नायडू नए उपराष्‍ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे. उपराष्‍ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान में उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवर गोपालकृष्‍ण गांधी को 272 वोटों से हराया था. वेंकैया नायडू को 516 वोट मिले जबकि गोपालकृष्ण गांधी को 244 मत मिले थे.

उपराष्‍ट्रपति बनने वाले नायडू आरएसएस की पृष्‍ठभूमि के दूसरे नेता हैं. इससे पहले बीजेपी के नेता भैरों सिंह शेखावत (1923-2010) इस पद के लिए 2002 में चुने गए थे. नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा मैं कृतार्थ हूं.

मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सभी पार्टी नेताओं का समर्थन देने के लिये आभारी हूं. वेंकैया नायडू ने कहा कि मैं उपराष्ट्रपति संस्था का उपयोग राष्ट्रपति के हाथ मजबूत बनाने के लिए करूंगा और ऊपरी सदन की मर्यादा को कायम रखूंगा.

पहली बार अपनी उम्मीदवारी पर कुछ ऐसा था रिएक्शन
दरअसल, कुछ समाचारपत्रों और टीवी चैनलों द्वारा अप्रैल माह से ही नायडू को उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित दावेदार बताया जाने लगा था. 30 मई को पत्रकारों ने जब इस संदर्भ में उनसे सवाल किया था तो उन्होंने चिर-परिचित शैली में जवाब देते हुए कहा था, “न मैं राष्ट्रपति बनना चाहता हूं, न उपराष्ट्रपति… मैं सिर्फ ‘उषा-पति’ बनकर खुश हूं…”

कुछ ऐसा रहा राजनीतिक सफर

वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई, 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में हुआ.नेल्लोर से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं से राजनीति में स्नातक किया. विशाखापट्टनम के लॉ कॉलेज से अंतरराष्ट्रीय कानून में डिग्री ली. कॉलेज के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए.

नायडू पहली बार 1972 में जय आंध्रा आंदोलन से सुर्खियों में आए. 1975 में इमरजेंसी में जेल भी गए थे. -1977 से 1980 तक यूथ विंग के अध्यक्ष रहे. महज 29 साल की उम्र में 1978 में पहली बार विधायक बने. 1983 में भी विधानसभा पहुंचे और धीरे-धीरे राज्य में भाजपा के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे. बीजेपी के विभिन्न पदों पर रहने के बाद नायडू पहली बार कर्नाटक से राज्यसभा के लिए 1998 में चुने गए. इसके बाद से ही 2004, 2010 और 2016 में वह राज्यसभा के सांसद बने.

1999 में एनडीए की जीत के बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय का प्रभार दिया गया. 2002 में वे पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. वे दिसंबर 2002 तक अध्यक्ष रहे. इसके बाद 2004 में वह दोबारा अध्यक्ष बने. साल 2004 में नायडू राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, लेकिन एनडीए की हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. 2014 में बीजेपी को मिली ऐतिहासिक जीत के बाद उन्हें शहरी विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया.

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