मोदी ने खोई PM की गरिमा, अपने भाषण मे फ़िर से बने मज़ाक

मोदीजी भारत के एक ऐसे प्रधानमंत्री है जो दुनिया के सबसे अनपढ़ प्रधानमंत्री है। हाल ही में दिए अपने भाषण में फ़िर से मोदी ने बिना तैयारी के माइक के सामने आकर कुछ भी बक दिया। हम भारतवासी और उम्मीद भी क्या कर सकते है जब प्रधानमंत्री को कुछ भी नहीं पता। 31 दिसम्बर की शाम 7:30 बजे मोदी ने अपने भाषण में खुद अपना और अपनी पार्टी का मज़ाक उड़ा दिया और कमाल की बात ये है की मोदी जी ये गलती अपने हर भाषण में करते है।

बेस्ट एक्टर अवार्ड गोज़ टू…

भाषण मे किसी एक्टर की तरह रोना, झूठ बोलना, भारत के 90% लोगों को बेवकूफ बनाना ही मोदी का एजेंडा रहा है। दुर्भाग्य की बात ये है की मोदी की ये खुली बेवकूफियां बिकाऊ मीडिया नहीं दिखाता, उल्टा बिकाऊ मीडिया तो मोदी..मोदी..मोदी करने मे व्यस्त है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम भारत के अच्छे भविष्य की कामना भी नहीं कर सकते है। मित्रों! मोदी का एजेंडा समझो, जिस व्यक्ति को हर बात बतानी पड़ती है वो RBI और फाइनेंस मिनिस्ट्री को ज्ञान दे रहा है।

उल्लू समझे उल्लू की भाषा

मोदी के भाषण सुनने के लिए दिमाग की नहीं भक्त बनने की जरुरत है। मोदी जो बोलते है या तो भक्त समझ सकते है और या फ़िर उन्ही की पार्टी के लोग। मोदी की बातों को समझने के लिए या तो आपको भक्त होना पड़ेगा या अपने कान, आँख और मुँह बंद करने पड़ेंगे क्यूंकि जब एक उल्लू बोलता है तो उसको समझने के लिए उल्लू होना ज़रूरी है। आज यही सब हो रहा है, जब एक आम आदमी मोदी पर सवाल उठाता है तो उल्लुओं की फौज़ उसके पीछे पड़ जाती है। मोदी और उनके भक्तों का यही रवैय्या भारत को दुनिया के सामने मज़ाक का पात्र बना रहे है और कमाल की बात ये है की इस बात का पता मोदी और उनके भक्तों को बिलकुल भी नहीं है क्यूंकि इसके लिए दिमाग का होना बहुत ही ज़रूरी है।

लगता है जैसे मोदी ये चाहते है की उनको सब कुछ पता हो, और अपनी पार्टी के हर नेता का काम वो अकेले करे, क्यूंकि 31 दिसम्बर 2016 की शाम को दिए अपने भाषण मे मोदी जी ने कुछ नया न कहते हुए पुरानी नीतियों को नया बताकर भक्तों को खुश कर दिया जैसा मोदी जी शुरू से करते आ रहे हैं।

loading...