EVM पर मोदी सरकार ने दो टूक कहा- जनता को कोई अधिकार नहीं, जनता तय नहीं करेगी कि वोट कैसे पड़े?

देश में EVM मशीन की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट EVM और VVPAT को लेकर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मतदाताओं को यह तय करने का अधिकार नहीं कि वोट कैसे पड़ना चाहिए।

केंद्र सरकार ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ-साथ VVPAT मशीन के इस्तेमाल को जरूरी बताने की याचिकाओं का विरोध किया। कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया कि VVPAT महज EVM की बैकअप सुविधा है। मंत्रालय ने कहा कि EVM विश्वसनीय है और इसके साथ छेड़छाड़ संभव नहीं है। न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही किसी अन्य ने EVM में गड़बड़ी को लेकर कोई आदेश पारित किया है.

मोदी सरकार ने कहा कि ऐसे में उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जाना चाहिए जिनमें VVPAT के इस्तेमाल जरूरी करने की गुहार की गई है। मंत्रालय ने कहा है कि वोट देने का अधिकार के तहत यह नहीं आता कि मतदाताओं को यह चुनने का अधिकार हो कि वोट किस प्रकार पड़ना चाहिए। यह काम चुनाव आयोग पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

इससे पहले चुनाव आयोग ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि गुजरात चुनाव में तभी VVPAT मशीन का इस्तेमाल किया जा सकेगा जब सितंबर तक मशीनें मिल जाएंगी। बता दें कि देशभर में EVM मशीनों पर उठते हैकिंग से संबंधित सवालियां निशान लगते रहे हैं।

इसी के चलते चुनाव आयोग ने अगले चुनावों में VVPAT मशीनों के इस्तेमाल के बारे में सोचा है। इसके पहले कई राजनीतिक दल EVM मशीनों से छेड़छाड़ के मामले उठा चुके हैं। कुछ ने तो इसे हैक करने का चैलेंज भी किया था।

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