जिस जमी पर इंच भर हासिल करना दूभर है, वहां पतंजलि और जिओ ने इतना बड़ा मैदान कैसे कब्जा लिया?

भारत के कारोबार जगत में आज जिन दो कंपनियों की सबसे ज्यादा चर्चा है वे हैं पतंजलि आयुर्वेद और रिलायंस जिओ. ऐसे समय में जब एफएमसीजी (फ़ास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) और टेलिकॉम के क्षेत्र में गलाकाट प्रतिस्पर्धा है, जहां कंपनियां तिनका-तिनका मार्जिन पर काम कर रही हैं, जहां विशेषज्ञ ये कहते रहे हैं कि इन दोनों क्षेत्रों में ग्रोथ की संभावनाएं कम हो गयी हैं, वहीं इन दोनों कंपनियों ने सारे समीकरण सिर के बल खड़े कर दिए हैं.

टेलिकॉम में मोबाइल घनत्व (प्रति व्यक्ति मोबाइल) 80 फीसदी हो गया है. ऐसे में कंपनियों को एक-एक प्रतिशत मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पडता है. लेकिन रिलायंस जिओ ने एक साल से भी कम समय में लगभग 10 करोड़ से अधिक ग्राहक बना लिए हैं. आज उसकी बाजार हिस्सेदारी 10 फीसदी के ऊपर है. डेटा सेगमेंट में तो यह हिस्सेदारी दूसरे सभी खिलाड़ियों से ज्यादा है.

हाल यह है कि एयरटेल, वोडाफ़ोन, आइडिया जैसी दिग्गज कंपनियों के चेयरमैन सरकार से गुहार लगा रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार बाजार में दखल दे ताकि वे रिलायंस जिओ के ताप से बच सकें. उनके सीईओ बोर्डरूम मीटिंगों में बैठकर इस दिशा में रणनीतियां बना रहे हैं.

एफएमसीजी का भी यही हाल

दूसरी तरफ एफएमसीजी के बाज़ार का हाल भी कुछ ऐसा ही है. यहां हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, आईटीसी, कोलगेट-पामोलिव, प्रॉक्टर एंड गैम्बल और ब्रिटैनिया इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां रामदेव बाबा की पतंजलि आयुर्वेद से बचने की जुगत लगा रही हैं.

जहां औसत तौर पर एफ़एमसीजी में कंपनियां की सालाना 10 फीसदी की ग्रोथ है, वहीं पतंजलि आयुर्वेद ने लगातार दो वित्त वर्षों से 100 फीसदी से ऊपर की ग्रोथ दर्ज की है. 2016-2017 में पतंजलि का व्यवसाय 5000 करोड़ से बढ़कर 10561 करोड़ रु हो गया है. पतंजलि घी और उसका टूथपेस्ट दंतकांति आज घर-घर की रसोई और बाथरूम में नज़र आने लगे हैं. ताजा आंकड़े देखें तो दंत कांति और पतंजलि घी की बाज़ार में हिस्सेदारी क्रमशः 14 और 13.9 फीसदी की है. वहीं शैंपू बाज़ार में केश कांति 7.8 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ ताल ठोक रहा है.
लेकिन वे कौन से कारण हैं जिन्होंने इन दोनों कंपनियों को आज देश में सबसे ज़्यादा चर्चित और सफल बना दिया है?

Indian Prime Minister Narendra Modi attends a meeting with Russian and Indian officials and businessmen during his meeting with Russian President Vladimir Putin in the Kremlin in Moscow, Thursday, Dec. 24, 2015. (AP Photo/Pavel Golovkin)

यूनिलीवर, नेस्ले, कोलगेट-पामोलिव और आईटीसी जैसी एफएमसीजी कंपनियां कई दशकों से भारत के बाज़ार में थीं. इन्होंने हमारे जीने के तरीकों में बदलाव कर दिया है. मसलन एक ज़माने में जब लोग दातून या कोयले से दांत साफ करते थे, या फिर पायरिया के मरीज़ सरसों के तेल और नमक से, तब टूथपेस्ट हमारे लिए नयी चीज़ थी. ठीक उसी प्रकार खाने में हमने या तो घानी का तेल इस्तेमाल किया था या फिर देशी घी. वनस्पति घी हमारे बाजार को एफएमसीजी कंपनियों की देन है. जानकारों के मुताबिक पतंजलि आयुर्वेद ने भारतीय समाज की पारंपरिक मान्यताओं को नए अंदाज़ में पेश किया और ग्राहकों को यकीन दिलाया कि ‘पुराना अच्छा था.’ ठीक इसी तरह रिलायंस जिओ ने भी हर कंपनी के ‘बड़े-से बड़े नेटवर्क, सबसे सस्ती कॉल दरें, मुफ्त डेटा’ के दावों को चुनौती दी.

आम लोगों का भरोसा

एफएमसीजी क्षेत्र में क्रांति से पहले बाबा रामदेव अपने योग शिविरों और टीवी के जरिये देश भर में प्रसिद्ध हो गए थे. शिविरों में लोगों का खड़ा होकर यह कहना कि प्राणायाम से वजन कम हुआ है, कई जटिल बीमारियां ख़त्म हो गयी हैं, एक सोची-समझी रणनीति थी या हकीक़त नहीं कहा जा सकता. पर यह जरूर कहा जा सकता है कि इसने लोगों में रामदेव के प्रति भरोसा जगाया. जानकार मानते हैं कि यह बहुत बड़ी घटना थी. देश ने बाबा रामदेव को योग बनाम एलोपैथी की जंग के तौर पर देख लिया. जब उनके उत्पाद बाज़ार में आये तो लोगों ने उसी विश्वास के साथ उन्हें खरीद भी लिया.

ठीक इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज आम लोगों के बीच में एक विश्वास का प्रतीक थी. इसके संस्थापक धीरुभाई अंबानी ने सबसे पहले आम निवेशकों में अपनी कंपनी के प्रति विश्वास पैदा किया. इसके लिए उन्होंने अपने शेयरधारकों को तब भी डिविडेंड या लाभांश दिया जब कंपनी को मुनाफ़ा कम होता था. रिलायंस इंडस्ट्रीज आम लोगों से जुड़ चुकी थी. जब रिलायंस जिओ ने अपनी सेवाएं शुरु की तो उनके सफल होने के पीछे यही विश्वास था.

हालांकि कई इसके पीछे की वजह जिओ के मुफ्त ऑफर को बताते हैं लेकिन जिओ से पहले भी रिलायंस कम्युनिकेशन, एमटीएस और एयरसेल जैसी कंपनियां ऐसा कर चुकी थीं. हालांकि उन सब की छवि कुछ ऐसी थी कि ग्राहक बोलते थे कि ‘आज तो फ्री दे रहे हैं, बाद में बंद कर देंगे. रिलायंस जिओ ने लोगों का भरोसा बरकरार रखा. टेलिकॉम कंपनियों की वैल्यू एडेड सर्विसेज से होने वाले बैलेंस में कटौती से ग्राहक खासे नाराज़ होते थे, कॉल ड्रॉप्स की समस्या भी काफी बढ़ गयी थी. जानकारों के मुताबिक जिओ का साफ-सुथरा नेटवर्क और कोई छिपे हुए चार्जेज न होने जैसी खासियतें एक क्रांति ले आई.

सरलता की राह

मैनेजमेंट की कक्षाओं में पढाया जाता है कि कंपनी के पास प्रति उत्पाद विविधता होनी चाहिए. इसे मैनेजमेंट की भाषा में ‘प्रोडक्ट रेंज’ कहते हैं. मसलन- टूथपेस्ट है तो हर वर्ग के लिए अलग. विज्ञापन यानी एडवरटाइजिंग के जरिये इसे लोगों के दिमागों में भरा जाता है. ग्राहक को बताया जाता है कि क्रिस्टल वाला टूथपेस्ट आम सफेद टूथपेस्ट से अलग है.

इसी तरह टेलिकॉम कंपनियों के पास प्रीपेड और पोस्टपेड के लगभग 50 से ऊपर प्लान होते हैं. कंपनियां बोलती हैं कि हर किसी की जरूरत के हिसाब से प्लान है. अफ़सोस है कि मैनेजमेंट में अंग्रेजी की वह कहावत नहीं पढ़ाते जो कहती है, ‘आनेस्टी एंड सिंप्लिसिटी नेवर गो आउट ऑफ़ फैशन’- ईमानदारी और सरलता हमेशा में चलन में रहते हैं.

इन दोनों कंपनियों ने इस बात को बेहतर तरीक़े से समझ लिया था. जिओ ने फ्री सेवा बंद करने के बाद जो प्लान दिए उनमें ज्यादा जोड़-तोड़ या घुमाव नहीं थे. कंपनी ने ग्राहकों को उलझाने की कोशिश नहीं की. इसी तरह यूं तो पतंजलि ने कई प्रकार के शैंपू और बिस्किट्स लांच किये हैं पर सबसे ज्यादा चलने वाले उत्पाद हैं – देशी घी और दंत कांति मंजन या टूथपेस्ट. इनमें कोई प्रोडक्ट रेंज नहीं है.

कीमतें

जिओ के प्लान अनलिमिटेड कालिंग या डेटा वाले थे. ग्राहक एक मुश्त राशि देकर फिर चिंता नहीं कर रहा था कि अब रीचार्ज खत्म हुआ. पतंजलि आयुर्वेद ने भी अपनी कीमतें कम और आसान रखीं. बाबा रामदेव ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘हमारे यहां पर करोड़ रुपये की तनख्वाह पाने वाले लोग नहीं है. न ही कोई एक्टर या एक्ट्रेस हमारे लिए प्रचार करते हैं और न ही मुनाफ़ा कमाना हमारा उद्देश्य है. हम उत्पाद भी सीधे किसानों से लेते हैं, लिहाज़ा हमारी कीमतें कम हैं.’
एडवरटाइजिंग और मीडिया

बाबा रामदेव मीडिया पतंजलि आयुर्वेद की कामयाबी के लिए मीडिया को भी श्रेय देते हैं. एक साक्षात्कार में उनका कहना था, ‘हमने तो पतंजलि आयुर्वेद को एक से दस प्रतिशत ही बनाया है, मीडिया ने इसे 90 फीसदी बनाया है.’ पतंजलि के लिए बाबा रामदेव और बालकृष्ण से बेहतर और बड़ा ब्रांड एम्बेसडर कोई हो ही नहीं सकता था.

उधर, रिलायंस जिओ ने अमिताभ बच्चन, कंगना रनौत और शाहरुख़ खान जैसे सितारों का इस्तेमाल किया. हालांकि उसकी सबसे ज़्यादा चर्चा तब हुई जब कंपनी ने अपने मीडिया कैंपेन में अमेरिका की ‘टाइम मगज़ीन’ के कवर पेज पर छपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो को शामिल कर लिया. मोदी जी से बड़ा ब्रांड एम्बेसडर कौन हो सकता था! हालांकि इस पर काफी विवाद भी हुआ और अधिकृत मंजूरी के बिना प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल करने पर कंपनी ने माफी भी मांगी. लेकिन इस विवाद ने भी जिओ को पब्लिसिटी देने का काम ही किया.
स्वदेशी और डिजिटल इंडिया

बढ़ते राष्ट्रवाद का दौर पतंजलि आयुर्वेद के लिए वरदान बनकर आया. कंपनी स्वदेशी फैक्टर को भुनाने में सफल हुई. उधर, रिलायंस जिओ ने भी खुद को प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम से जोड़कर पेश किया और कारगर हुई.

डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क

पतंजलि आयुर्वेद ने पारंपरिक दुकानों से अलग हटकर खुद का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क खड़ा किया. पतंजलि मेगा स्टोर, सुपर डिस्ट्रीब्यूटर, आरोग्य चिकित्सालय जैसे गैर पारंपरिक तरीकों से उसने बाजार में पहचान स्थापित की. इसने एक ब्रांड के रूप में उसे मजबूती दी.

उधर, रिलायंस जिओ ने भी टेलिकॉम रिटेल आउटलेट्स से अलग हटकर अपने डिजिटल स्टोर बनाये. जहां अन्य कंपनियां ग्राहक से एक्टिवेशन फॉर्म भरवाती थीं, जिओ ने सबसे पहले आधार कार्ड के ज़रिये मोबाइल एक्टिवेशन की प्रक्रिया को शुरू किया. जिओ ने कुछ हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर बंडल-ऑफर को भी सफल बनाया. दुनिया भर में मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियां ग्राहकों को सस्ती कीमत पर हैंडसेट उपलब्ध करवाकर एक तय अवधि के लिए उस फ़ोन को अपने नेटवर्क के साथ ब्लॉक कर देती हैं. इसका मतलब है कि ग्राहक उस फ़ोन में कोई दूसरा सिम नहीं लगा सकता. इसे ही बंडल ऑफर कहते हैं. खबरें हैं कि कंपनी जल्द ही महज 500 रुपये में 4जी वोल्ट फीचर फोन देकर एक और बंपर बंडल ऑफर लाने वाली है.

कुल मिलाकर इन दोनों ने कंपनियों ने आम आदमी के विश्वास को आधार बनाकर बाज़ार में अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है. अब देखना यह है कि क्या आने वाले समय में यह विश्वास बना रह पाता है और क्या ये दोनों कंपनियां बाज़ार में अपनी बादशाहत कायम कर पाती हैं. क्या होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, पर फिलहाल तो पतंजलि आयुर्वेद और रिलायंस जिओ को टक्कर देने वाला दूर-दूर तक नज़र नहीं आता.

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