देश कबतक झेलेगा मंहगाई की मार ? कच्चे तेल में भारी गिरावट फिर भी पेट्रोल 80 रू खरीद रहे लोग

इसी साल 1 मई से तय हुआ की डीजल-पेट्रोल के दाम अब रोजाना तय होंगे। मगर ज़मीनी हकीक़त से दूर हर दिन बढ़ती-घटती कीमतों पर देश आज फिर वही आकर खड़ा हो चुका है जहाँ से वो चला था। मोदी सरकार में पेट्रोल की कीमत अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सबसे ज्यादा मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये तक पहुचं चुकी है।

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 53
फीसदी तक कम हो गए हैं, लेकिन पेट्रोल डीजल के दाम घटने की बजाय बेतहाशा बढ़ गए हैं। इसके पीछे असली वजह यह है कि तीन सालों के दौरान सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कई गुना बढ़ा दी है। मोटे अनुमान के अनुसार पेट्रोल पर ड्यूटी 10 रुपये लीटर से बढ़कर करीब 22 रुपये हो गई है।

पेट्रोल के बढ़ते दामों का लगातार बढ़ते रहना देश की अर्थव्यस्था पर बुरा असर दाल सकता है। मगर सरकार की झोली भरती रहेगी। SMC ग्लोबल की एक रिसर्च मुताबिक 1 जुलाई, 2014 को कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि उस दिन देश में पेट्रोल का दाम 73।60 प्रति लीटर था।

1 अगस्त, 2014 को कच्चे तेल में नरमी आई और इसका 106 डॉलर प्रति बैरल हो गया। उस दिन देश में डीजल की कीमत 58।40 रुपये प्रति लीटर थी। अगर मौजूदा साल की बात करें तो बुधवार यानी 13 सितंबर, 2017 को कच्चे तेल का भाव 54 डॉलर प्रति बैरल है।

जुलाई से पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इस समय पेट्रोल की दर तीन साल के अपने उच्च स्तर पर है। पेट्रोल कीमतों में प्रतिदिन मामूली संशोधन होता है। दिल्ली में 16 जून को पेट्रोल का दाम 65।48 रुपये लीटर था, जो 2 जुलाई को घटकर 63।06 रुपये लीटर पर आ गया था।

हालांकि उसके बाद से सिर्फ गिनती के दिन छोड़कर प्रतिदिन पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इन मौकों पर पेट्रोल का दाम 2 से 9 पैसे लीटर घटा था।

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