बीमार मां बाप को तराजू में उठाकर बर्मा से बांग्लादेश पहुँचने वाले अय्यूब ने कुछ यूं सुनाई ज़ुल्म की दास्तान

ज़ुल्म और अत्याचार की मार झेलने के बाद रोहिंग्या मुसलमान जब मौसम की तल्खी और भूख प्यास सहन करते हुए बांग्लादेश के तट पर पहुंचे तो उनमें 25 वर्षीय रोहिंग्या नोजवान अय्यूब भी शामिल था. जिसे देखकर न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि मीडिया के प्रतिनिधि भी हैरान रह गए.

अय्यूब अपने बूढ़े बुज़ुर्ग बीमार माता-पिता को सामान तोलने वाले तराजू में बिठाकर बांग्लादेश लाया. जिसको बांग्लादेश सीमा पर आने के लिए पांच दिनों का वक्त लगा. इस यात्रा के दौरान अय्यूब कई जंगलों, नदियों और झाड़ियों से गुजरता हुआ बांग्लादेश पहुंचा.

अय्यूब के 80 वर्षीय पिता दादू मियां और 65 वर्षीय मां अच्छीया खातून बुढ़ापे की वजह से नहीं चल सकते थे. अपनी रूदाद बताते हुए अय्यूब ने कहा कि उनके घर को आग लगा दी गई थी लेकिन वह आग फैलने से पहले घर से बाहर निकल आये थे.

उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. सिर्फ रूखा सुखा खाना घर से उठाकर भागे थे लेकिन उनकी बूढी मां सूखा भोजन नहीं खा सकती थी इस वजह से बड़ी तकलीफ और शिद्दत के साथ सफर तय करना पड़ा.

अय्यूब ने बताया कि घर से लेकर चले सूखे खाद्य पदार्थ भी दो दिन बाद ख़त्म हो गए और उन्होंने अगले तीन दिनों में भूखे पेट अपने मां बाप को कांधों पर उठाकर चलना पड़ा.

अय्यूब ने अपने माता-पिता के साथ अल्बानिया सीमा के माध्यम से बांग्लादेश में प्रवेश किया है , म्यांमार से बांग्लादेश आने वाले रोहिंग्या अपने साथ दर्दनाक दास्तान ज़ुल्म लेकर आरहे हैं.

आप को बता दे कि इस युवक की फोटो खूब वायरल हो रही है ।यर इसे पसंद किया जा रहा है ।युवक की तारीफ भी की जा रही है कि किस तरह बूढ़े मा बाप को उन दरिंदों के बीच से तराजू में बैठा कर लाया है।

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