नोटबंदी से पहले अरुण जेटली के पास था 65,00,000 कैश – CHRI रिपोर्ट

भारत में नोटबंदी की मार पड़ी है तो सिर्फ़ गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों पर, आये दिन भाजपा नेताओं के पास भारी मात्रा में नए और पुराने नोटों का मिलना इस बात का साक्षात् प्रमाण है की नोटबंदी करने का मकसद कालेधन पर लगाम लगाना बिलकुल भी नहीं था। नोटबंदी सिर्फ़ और सिर्फ़ एक सोची समझी स्कैम करने की रणनीति थी। जिसका शिकार भारत के गरीब और मध्यम वर्ग हुए हैं। अब CHRI (Common Wealth Human Rights Initiative) रिपोर्ट से पता चला है की भाजपा के नेता और भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास नोटबंदी से पहले लगभग 65,00,000 कैश था।

अरुण जेटली से इस कैश के बारे में कोई पूछताछ नहीं हो रही और दूसरी तरफ अगर भारत का आम आदमी अपने ही खाते में 50,000 रुपये जमा करवाता है तो उसे इसका भी हिसाब देना पड़ेगा। बैंकों और एटीएम की लाइनों में आम भारतीयों ने अपने ही पैसों के लिए अपनी जानें गवां दी और भारत का एक भी अमीर और बड़े-बड़े उद्योगपति इन लाइनों मे नज़र भी नहीं आये। वाह रे! सरकार, गरीबों के खून से सींचे इस झूठे विकास का क्या फ़ायदा। आम भारतीयों के मनन मे इसको लेकर काफी सवाल है लेकिन इन सवालों का जवाब न देश के प्रधानमंत्री मोदी दे रहे और न ही देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली।

सूत्रों के अनुसार नोटबंदी से पहले बहुत से मंत्रियों और उद्योगपतियों के पास भारी मात्रा में कैश मौज़ूद था, इस लिस्ट में देश के वित्त अरुण जेटली का नाम सबसे ऊपर था। CHRI रिपोर्ट में कई मंत्रियों के नाम सामनें आये है और CHRI रिपोर्ट ने इन मंत्रियों के कैश के सम्बन्ध में कई खुलासे किये हैं।

 

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